📚 Knowledge

12 जुलाई–4 अगस्त के बीच लॉन्च हो सकता है भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1'

By mb Update Team · 03 Jul 2026, 10:49 am IST
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए यह ऐतिहासिक कदम होगा। हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच अपने पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का परीक्षण मिशन 'आगमन' लॉन्च करेगी। लगभग सात मंजिला ऊंचा यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों को 450 किमी ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने में सक्षम है। मिशन से रॉकेट की प्रणोदन, नेविगेशन, नियंत्रण और समग्र उड़ान क्षमता का परीक्षण होगा। इससे पहले कंपनी 2022 में विक्रम-एस का सफल प्रक्षेपण कर चुकी है।
भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक नया इतिहास रचने जा रहा है। हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच अपने पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' का परीक्षण प्रक्षेपण करने की तैयारी में है। यह भारत के निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल होगा, जो छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है। मिशन का नाम – 'आगमन' कंपनी ने इस पहली परीक्षण उड़ान का नाम 'आगमन' रखा है। यह मिशन केवल रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि उड़ान के हर चरण का वैज्ञानिक विश्लेषण भी करेगा। इस दौरान रॉकेट की प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System), विभिन्न चरणों का अलग होना (Stage Separation), मार्गदर्शन (Guidance), नेविगेशन (Navigation), नियंत्रण प्रणाली (Control System) और समग्र प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। लॉन्च की तारीख कैसे तय होगी? हालांकि लॉन्च विंडो 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच निर्धारित की गई है, लेकिन अंतिम तिथि श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में अंतिम तकनीकी तैयारियों, मौसम की स्थिति, सुरक्षा मंजूरियों और लॉन्च रेंज की उपलब्धता के आधार पर तय होगी। विक्रम-1 की खासियतें लगभग सात मंजिला ऊंचा बहु-चरणीय (Multi-stage) रॉकेट। पूरी संरचना कार्बन कंपोजिट सामग्री से बनी है, जिससे वजन कम और मजबूती अधिक मिलती है। इसमें 3D प्रिंटिंग तकनीक से विकसित इंजन और उच्च क्षमता वाले ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं। यह 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे उपग्रहों को लगभग 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित कर सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन? स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक एवं CEO पवन कुमार चंदाना के अनुसार, किसी भी रॉकेट की वास्तविक क्षमता का आकलन केवल जमीन पर किए गए परीक्षणों से संभव नहीं होता। उड़ान के दौरान प्राप्त आंकड़े भविष्य के लॉन्च वाहनों को और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। पहले भी रच चुकी है इतिहास यह स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है। इससे पहले 18 नवंबर 2022 को कंपनी ने विक्रम-एस का सफल उप-कक्षीय (Sub-orbital) प्रक्षेपण किया था, जो भारत से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला पहला निजी रॉकेट बना था। अब विक्रम-1 के साथ कंपनी भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को एक नई ऊंचाई देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
👁2
Read at source →