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जनरल धीरज सेठ बने भारत के 31वें थल सेनाध्यक्ष

By mb GK Team · 01 Jul 2026, 10:48 pm IST
जनरल धीरज सेठ ने भारत के 31वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने सेवानिवृत्त जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लिया। 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन प्राप्त जनरल सेठ को लगभग 40 वर्षों का सैन्य अनुभव है। वे दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिणी कमान, 21 स्ट्राइक कोर तथा सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व कर चुके हैं। सेना के आधुनिकीकरण, दीर्घकालिक क्षमता विकास और उग्रवाद-रोधी अभियानों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
जनरल धीरज सेठ बने भारत के 31वें थल सेनाध्यक्ष: चार दशक का अनुभव अब सेना के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए जनरल धीरज सेठ ने देश के 31वें थल सेनाध्यक्ष (Chief of the Army Staff) का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लिया, जो 40 वर्षों से अधिक की शानदार सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक लॉन में आयोजित औपचारिक समारोह में सेना की कमान जनरल धीरज सेठ को सौंपी गई। जनरल धीरज सेठ का सेना प्रमुख बनना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि ऐसे समय में हुआ है जब भारत की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। आधुनिक युद्ध तकनीकों, सीमाई सुरक्षा, आतंकवाद और साइबर खतरों के दौर में उनके अनुभव से भारतीय सेना को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। सैन्य जीवन की शुरुआत जनरल धीरज सेठ ने वर्ष 1986 में भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर में कमीशन प्राप्त किया। अपने लगभग चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनका करियर नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक सोच और जमीनी अनुभव का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र रहे जनरल सेठ ने अपने सैन्य जीवन में हर स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। यही कारण है कि उन्हें भारतीय सेना के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। कई महत्वपूर्ण कमानों का नेतृत्व जनरल धीरज सेठ ने सेना की कई महत्वपूर्ण फॉर्मेशन का नेतृत्व किया है। उन्होंने देश की सबसे महत्वपूर्ण स्ट्राइक फॉर्मेशन में से एक 21 स्ट्राइक कोर का नेतृत्व किया। इसके अलावा वे सुदर्शन चक्र कोर के कमांडर भी रह चुके हैं। उन्होंने दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनेक सैन्य कार्यक्रमों तथा औपचारिक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक संचालन किया। इसके बाद उन्हें दक्षिण-पश्चिमी कमान (जयपुर) और बाद में दक्षिणी कमान (पुणे) की कमान संभालने का अवसर मिला। एक अधिकारी द्वारा दोनों प्रमुख कमानों का नेतृत्व करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है। उप सेना प्रमुख के रूप में भी निभाई अहम भूमिका सेना प्रमुख बनने से पहले जनरल धीरज सेठ उप सेना प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण, क्षमता विकास और भविष्य की युद्ध रणनीतियों पर महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में रही है जो बदलती परिस्थितियों के अनुसार सेना को तैयार करने में विश्वास रखते हैं। आधुनिक हथियार, नई तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था को बढ़ावा देने में उनका विशेष योगदान माना जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखाई नेतृत्व क्षमता दक्षिणी कमान के प्रमुख रहते हुए जनरल धीरज सेठ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की उच्च स्तरीय तैयारी सुनिश्चित की। पश्चिमी मोर्चे पर अभियानगत तैयारियों को मजबूत बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। संकट की परिस्थितियों में तेज निर्णय लेने और सैनिकों का प्रभावी नेतृत्व करने की उनकी क्षमता की सैन्य विशेषज्ञों द्वारा सराहना की जाती है। सेना के आधुनिकीकरण पर रहेगा विशेष फोकस आज का युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और आधुनिक निगरानी प्रणालियां युद्ध का स्वरूप बदल रही हैं। जनरल धीरज सेठ को सेना के आधुनिकीकरण का रणनीतिकार माना जाता है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना नई तकनीकों को तेजी से अपनाने, स्वदेशी रक्षा उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। सीमा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर लगातार सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे समय में सेना प्रमुख के रूप में जनरल सेठ के सामने सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाना बड़ी जिम्मेदारी होगी। उनका लंबा जमीनी अनुभव और विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में नेतृत्व भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत बनाने में सहायक साबित हो सकता है। जनरल उपेंद्र द्विवेदी को दी गई विदाई जनरल धीरज सेठ ने जिस पद का कार्यभार संभाला है, उस पद पर पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी कार्यरत थे। उन्होंने जून 2024 में 30वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। 40 वर्षों से अधिक की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद उन्हें साउथ ब्लॉक में आयोजित समारोह में गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की चार दशक से अधिक सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा। देश को नई उम्मीद जनरल धीरज सेठ का अनुभव, नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक सोच भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में सेना आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और तेज निर्णय क्षमता के साथ आगे बढ़ेगी। भारत की सुरक्षा व्यवस्था लगातार विकसित हो रही है और ऐसे समय में एक अनुभवी सैन्य अधिकारी का सेना प्रमुख बनना देश के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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