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त्रिपुरा सारिंदा को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI)
By mb GK IPR Team · 01 Jul 2026, 10:27 pm IST
त्रिपुरा सारिंदा को हाल ही में जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग प्रदान किया गया है। यह त्रिपुरा के आदिवासी समुदायों का पारंपरिक तार वाद्ययंत्र है, जो अपनी विशिष्ट कारीगरी, मधुर ध्वनि और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। जीआई टैग मिलने से इसकी मौलिक पहचान को कानूनी संरक्षण मिलेगा, स्थानीय कारीगरों को आर्थिक लाभ होगा तथा इस पारंपरिक वाद्ययंत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे त्रिपुरा की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
त्रिपुरा सारिंदा को हाल ही में जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग प्रदान किया गया है। यह त्रिपुरा के आदिवासी समुदायों, विशेषकर देबबर्मा, रियांग, जमातिया और अन्य जनजातियों की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लकड़ी से निर्मित इस तार वाद्ययंत्र को हाथ से तैयार किया जाता है और इसकी मधुर ध्वनि लोकगीतों, धार्मिक अनुष्ठानों तथा पारंपरिक उत्सवों में विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। इसकी विशिष्ट बनावट और निर्माण तकनीक पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है।
जीआई टैग मिलने से इस पारंपरिक वाद्ययंत्र की मौलिक पहचान को कानूनी संरक्षण मिलेगा और केवल निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से बने सारिंदा को ही इस नाम से बेचा जा सकेगा। इससे स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ने, नकली उत्पादों पर रोक लगाने, हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में त्रिपुरा की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। यह सम्मान राज्य की लोक परंपराओं और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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