Latest Bhopal stories on mBlog — short, visual news in a fast feed.
MPCST sponsored Seminar
Sagar Institute of Research and Technology Bhopal में MPCST के द्वारा Sponsored National Seminar आयोजित किया गया, इसका theme "AI INNOVATION DRIVING GLOBAL DIGITAL TRANSFORMATION" था| जोकि कई experts के द्वारा 18-19 June को Successfully organize हुआ, EC department के द्वारा ।
मध्य प्रदेश की 4 पारंपरिक कृषि उपजों को मिला GI टैग
मध्य प्रदेश की कृषि विरासत को बड़ी पहचान मिली है। राज्य की सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैंगनी अरहर और छत्रिय धान को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया गया है। इससे इन पारंपरिक कृषि उत्पादों को कानूनी संरक्षण, विशिष्ट पहचान और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर अवसर मिलेंगे। महाकौशल और आदिवासी क्षेत्रों के हजारों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। GI टैग से इन उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, बेहतर कीमत मिलने की संभावना होगी तथा प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात को भी नई गति मिलेगी।
भोपाल की बारिश : 2026 में
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार भोपाल, मालवा और निमाड़ क्षेत्रों में प्री-मानसून तथा मानसूनी बादलों को लगातार नमी मिलती रही। इसका मुख्य कारण अरब सागर की शाखा का अधिक सक्रिय रहना तथा बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं रही हैं।
2027 को 'युवा वर्ष' के रूप में मनाएगा मध्य प्रदेश
वर्ष 2027 को 'युवा वर्ष' के रूप में मनाने की घोषणा की गई है। अंतरराष्ट्रीय MSME दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में CM ने 760 से अधिक इकाइयों को 235 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि और 137 स्टार्टअप्स को 1.5 करोड़ रुपये की सहायता जारी की। साथ ही देवास, पांढुर्णा, टीकमगढ़ और उज्जैन में नए MSME भवन बनाने तथा उद्योगों के लिए 3,000 नए भूखंड आवंटित करने की भी घोषणा की।
भोपाल की ऐतिहासिक विरासत को नया जीवन
भोपाल में आठ और बारह दरवाजों वाली बारादरी, पत्थरों की नक्काशी और ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कारीगरी की मदद से किया जा रहा है। गोलघर का संरक्षण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि राजा खुशवक्त राय की समाधि सहित अन्य ऐतिहासिक संरचनाओं का जीर्णोद्धार जारी है। इस पहल का उद्देश्य शहर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
बुरहानपुर के केले को मिला GI टैग, किसानों की बढ़ेगी आय और पहचान
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के लिए बड़ी खुशखबरी है। अपनी मिठास और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध बुरहानपुर केले को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल गया है। इससे जिले के करीब 18 हजार किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। GI टैग मिलने से बुरहानपुर के केले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान मिलेगी तथा किसानों को बेहतर कीमत प्राप्त हो सकेगी। जिले में लगभग 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती होती है। साथ ही, केला प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात को भी नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर मजबूत होंगे।
Bhopal में आज: मैनिट स्टार्टअप वर्कशॉप
MANIT Bhopal में 24 और 25 जून को दो दिनों की स्टार्टअप incubation & design वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में अलग-अलग केंद्रीय तकनीकी संस्थान, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, MSME, entrepreneurs, startups, से जुड़े candidates और academic persons भी भाग लेंगे।
City की more update के लिए जुड़े रहे
आज का सुविचार 🌿
अगर रास्ते सही दिशा में ले जा रहे हैं,
फिर भी सफलता दूर दिखाई दे रही है,
तो रास्ता बदलने से पहले
खुद को बदलकर देखिए।
mBlog के साथ आपका आज का दिन शुभ हो !
इस weekend Bhopal में क्या खास
भोपाल में वैसे weekend के लिए कई plan बना सकते हों, पर इस weekend Bhopal के जनजातीय संग्रहालय याने Tribal museum में ‘शलाका जनजातीय चित्र प्रदर्शनी' चल रही है। गौंड चित्रकार रहेंगे वहां। यह प्रदर्शनी हर दिन आयोजित होगी और 30 जून 2026 तक चलेगी।
भोपाल Job अलर्ट
आज Bhopal की job related update में AIIMS द्वारा नॉन-फैकल्टी ग्रुप-ए पदों और पीएचडी कार्यक्रमों के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है। वहीं बैंकिंग और कॉर्पोरेट सेक्टर में IDFC FIRST Bank में एसोसिएट कस्टमर सर्विस मैनेजर जैसे पदों पर भर्ती कर रहा है। क्विक-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में Blinkit द्वारा पिकर/पैकर और डिलीवरी पार्टनर की भर्ती की जा रही है। बागमुगालिया और अवधपुरी सहित कई क्षेत्रों में इन पदों के लिए अच्छे वेतन की पेशकश की जा रही है।
भाग 10 : नई शक्ति का जन्म
कुछ दिनों बाद कंपास ने उसे एक अंतिम स्थान पर पहुंचाया।
वहां एक दिव्य प्रकाश उसका इंतजार कर रहा था।
आवाज आई—
"तुमने शक्ति का उपयोग स्वार्थ के लिए नहीं, सेवा के लिए किया।"
कंपास हवा में उठ गया।
उसकी रोशनी आरव के भीतर समा गई।
अब उसे कंपास की आवश्यकता नहीं थी।
वह दुनिया के किसी भी स्थान की झलक अपने मन में देख सकता था।
जरूरत पड़ने पर वहां पहुंच भी सकता था।
लेकिन यह तो बस शुरुआत थी...
क्योंकि उसी क्षण उसके सामने एक नया रहस्य खुला, जो पूरी दुनिया का भविष्य बदल सकता था...
(जारी रहेगा...)
भाग 9 : वापसी
जैसे ही सूरज निकला, कंपास सक्रिय हो गया।
आरव ने कांटा घुमाया।
एक प्रकाश द्वार खुल गया।
विशाल लहर उसके ऊपर गिरने ही वाली थी।
और अगले ही पल वह अपने शहर में पहुंच गया।
वह सुरक्षित था।
लेकिन यहां रात हो चुकी थी।
अब उसे समझ आया कि समय हर जगह अलग चलता है।
अगर वह गलत समय पर यात्रा करेगा तो फंस सकता है।
तभी कंपास फिर चमकने लगा।
और इस बार उसने उसे एक नई जगह दिखानी शुरू कर दी...
जो शायद उसकी सबसे बड़ी परीक्षा बनने वाली थी।
भाग 8 : अंतिम संघर्ष
आरव तेजी से समुद्र किनारे पहुंचा।
लेकिन तभी एक विशाल लहर उसकी ओर बढ़ी।
वह कई मंजिल ऊंची थी।
उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी।
वह कंपास को कसकर पकड़कर खड़ा रहा।
पहला मिनट...
दूसरा मिनट...
तीसरा मिनट...
लहर और करीब आ रही थी।
चौथा मिनट...
अचानक क्षितिज पर सूरज की पहली किरण दिखाई दी।
पांचवां मिनट...
कंपास चमक उठा।
लेकिन लहर उससे पहले पहुंचने वाली थी...
क्या वह समय रहते बच पाएगा?
भाग 7 : प्राचीन रहस्य
पहाड़ी के ऊपर एक गुफा थी।
गुफा के अंदर एक विशाल पत्थर रखा था।
उसी पर कंपास जैसा चिन्ह बना हुआ था।
जैसे ही आरव ने उसे छुआ, गुफा रोशनी से भर गई।
एक आवाज गूंजी—
"सच्ची शक्ति अच्छे हृदय वालों को ही मिलती है।"
आरव को पता चला कि उसका कंपास हजारों साल पुरानी एक दिव्य वस्तु है।
और वह अब उसका नया संरक्षक बन चुका है।
लेकिन तभी गुफा कांपने लगी।
बाहर तूफान और भी भयानक हो चुका था।
और कंपास ने दिखाया—
"सुबह होने में केवल 5 मिनट बाकी हैं..."
भाग 6 : जीवन और मृत्यु के बीच
आरव एक टूटी हुई शाखा से लटक गया।
तेज हवा उसे समुद्र में गिराने की कोशिश कर रही थी।
उसके हाथ धीरे-धीरे फिसल रहे थे।
उसे लगा शायद अब वह नहीं बच पाएगा।
उसने आंखें बंद कीं और भगवान को याद किया।
तभी उसकी नजर दूर पहाड़ी पर पड़ी।
वहां एक चमकता हुआ स्तंभ दिखाई दे रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसे वहां बुला रहा हो।
जान जोखिम में डालकर वह उस दिशा में बढ़ने लगा।
लेकिन रास्ते में एक और खतरा उसका इंतजार कर रहा था...
जिसे देखकर उसके कदम रुक गए।
भाग 5 : फंस चुका था आरव
आरव को पहली बार डर महसूस हुआ।
जब वह यहां आया था तब उसके शहर में दिन था।
लेकिन इस द्वीप पर रात हो चुकी थी।
मतलब वह तब तक वापस नहीं जा सकता था जब तक यहां सुबह न हो जाए।
तूफान हर मिनट और भयानक होता जा रहा था।
अचानक एक विशाल लहर उसकी ओर बढ़ी।
वह किसी तरह चट्टान पकड़कर बच गया।
लेकिन अगले ही पल बिजली उसके बहुत पास गिरी।
चट्टान टूट गई।
आरव सीधे समुद्र की ओर फिसलने लगा...
और नीचे केवल मौत उसका इंतजार कर रही थी।
भाग 4 : तूफान का द्वीप
कुछ समय बाद आरव ने कंपास घुमाया और एक रहस्यमयी द्वीप पर पहुंच गया।
लेकिन वहां पहुंचते ही उसने देखा कि समुद्र उफान पर था।
आसमान काले बादलों से भर चुका था।
इतना भयंकर तूफान उसने पहले कभी नहीं देखा था।
हवा इतनी तेज थी कि बड़े-बड़े पेड़ उखड़ रहे थे।
वह वापस लौटना चाहता था।
उसने कंपास निकाला।
लेकिन इस बार कंपास पर लाल रंग की रोशनी चमकी।
फिर एक संदेश दिखाई दिया—
"रात में वापसी संभव नहीं।"
भाग 3 : नई दुनिया, नए राज
अगले कुछ महीनों में आरव कई देशों में गया।
कहीं उसने बाढ़ पीड़ितों की मदद की, कहीं बच्चों को पढ़ाया और कहीं वैज्ञानिकों से नई तकनीकें सीखीं।
हर यात्रा में उसे दुनिया के बारे में कुछ नया ज्ञान मिलता।
लेकिन एक दिन मिस्र के एक पुराने पुस्तकालय में उसे एक प्राचीन किताब मिली।
उसमें उसी कंपास का चित्र बना था।
किताब में लिखा था—
"यह कंपास अपने मालिक की परीक्षा लेता है।"
और नीचे एक चेतावनी भी लिखी थी...
"एक दिन ऐसा आएगा जब यही शक्ति तुम्हारी जान भी ले सकती है।"
भाग 2 : रहस्यमयी कंपास
आरव के हाथ में एक सुनहरा कंपास था। यह सामान्य कंपास जैसा नहीं दिख रहा था। उसके ऊपर अजीब चिन्ह बने हुए थे।
घर पहुंचकर उसने कंपास का कांटा घुमाया।
अचानक कमरे में हवा का तेज भंवर बना और अगले ही पल वह गायब हो गया।
जब उसने आंखें खोलीं तो वह हजारों किलोमीटर दूर एक बर्फीले देश में खड़ा था।
आरव हैरान रह गया।
क्या यह सच में उसे दुनिया के किसी भी कोने में पहुंचा सकता था?
तभी कंपास के पीछे एक चमकता हुआ संदेश उभरा...
"इस शक्ति का उपयोग केवल अच्छे कार्यों के लिए करना।"
भाग 1 : भोला लेकिन चतुर
20 वर्ष का आरव एक कॉलेज छात्र था। स्कूल पास करने के बाद वह पढ़ाई के साथ लोगों की मदद करने में हमेशा आगे रहता था। कोई बुजुर्ग सड़क पार कर रहा हो, किसी दोस्त को नोट्स चाहिए हों, किसी गरीब को सहायता, आरव कभी मना नहीं करता था।
वह भगवान पर गहरा विश्वास रखता था। हर सुबह मंदिर जाकर प्रार्थना करता और यही मानता कि अच्छे कर्म व्यर्थ नहीं जाते।
एक दिन कॉलेज से लौटते समय उसे पुराने खंडहर के पास चमकती हुई अजीब वस्तु दिखाई दी
जैसे ही उसे हाथ में उठाया, चारों ओर तेज रोशनी फैल गई
इंटरनेशनल कांफ्रेंस में चमकी वैष्णवी शर्मा
भोपाल की प्रतिभाशाली छात्रा वैष्णवी शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने 8-9 दिसंबर को पैसिफिक यूनिवर्सिटी, उदयपुर (राजस्थान) में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में “बायोचार पोटेंशियल” विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके उत्कृष्ट शोध और प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण के लिए उन्हें “इंटरनेशनल बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन अवार्ड” से सम्मानित किया गया। वैष्णवी वर्तमान में वैष्णवी करियर कॉलेज (ऑटोनोमस), भोपाल से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स कर रही हैं। उनका शोध वायुमंडल पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह कार्य डॉ. अनिता सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।