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'स्नोबॉल अर्थ' : जब पूरी पृथ्वी बर्फ का गोला बन गई

By mb GK Team · 01 Jul 2026, 10:37 pm IST
करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी ने एक ऐसा दौर देखा, जब वह लगभग पूरी तरह बर्फ की मोटी चादर से ढक गई थी। इस घटना को 'स्नोबॉल अर्थ' कहा जाता है। 2026 में प्रकाशित एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, महाद्वीपों के विखंडन, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की कमी और अल्बीडो प्रभाव ने इस महा-हिमयुग को जन्म दिया। बाद में ज्वालामुखियों से निकलती कार्बन डाइऑक्साइड के कारण ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ा, जिससे बर्फ पिघली और पृथ्वी फिर सामान्य जलवायु की ओर लौटी।
'स्नोबॉल अर्थ' : जब पूरी पृथ्वी बर्फ की चादर से ढक गई कल्पना कीजिए कि पूरी पृथ्वी ध्रुवों से लेकर भूमध्य रेखा तक मोटी बर्फ से ढक जाए। वैज्ञानिक इस अवस्था को 'स्नोबॉल अर्थ' कहते हैं। वर्ष 2026 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन, जो Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित हुआ, ने इस रहस्यमयी जलवायु घटना पर नई जानकारी दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 72 से 63.5 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी ने भीषण हिमयुग का सामना किया था। उस समय महाद्वीपों के टूटने, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की कमी और अल्बीडो प्रभाव के कारण पृथ्वी लगातार ठंडी होती गई। बर्फ बढ़ने से सूर्य की अधिकतर किरणें अंतरिक्ष में परावर्तित होने लगीं, जिससे पूरी पृथ्वी लगभग बर्फ के गोले में बदल गई। शोध के अनुसार, लाखों वर्षों तक सक्रिय ज्वालामुखियों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में जमा होती रही। अंततः ग्रीनहाउस प्रभाव इतना बढ़ गया कि वैश्विक तापमान बढ़ने लगा और बर्फ पिघल गई। इस घटना के प्रमुख भूवैज्ञानिक प्रमाण 'कैप कार्बोनेट' चट्टानों के रूप में आज भी दुनिया के कई हिस्सों में मिलते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस परिवर्तन ने पृथ्वी पर जटिल जीवों के विकास की दिशा भी बदल दी।
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